new education policy 2020 नई शिक्षा निति 2020

NEW EDUCATION POLICY 2020 नई शिक्षा निति 2020


भारत सरकार ने जुलाई २०२० के आखिरी हफ्ते में नई शिक्षा निति की घोसणा की, जिसकी सहमति भारत सरकार के कैबिनेट ने प्रदान कर दी. यह NDA सरकार के 2014 के चुनाव के पहले के वादों में से एक था. इसके लिए २०१७ में ISRO के भूतपूर्व चेयरमैन श्री कस्तूरीरंगन जी की सहमति में एक समिति बनी थी जिसने २०१८ में इस नई शिक्षा निति का ड्राफ्ट या मसौदा HRD मंत्रालय को प्रस्तुत किया था. परन्तु 2019 के चुनावो के चलते इसे कुछ समय के लिए टाल दिया गया था. इससे पहले अभी तक शिक्षा निति १९८६ चली आ रही है। जिसका संसोधन १९९२ में किया गया था.


क्या है नई शिक्षा निति 2020 (what is new education policy)


नई शिक्षा निति 2020 को पहले ड्राफ्ट के रूप में २०१८ में प्रस्तुत किया गया था। जो की HRD मंत्रालय द्वारा सहमति और सलाह के लिए जनता तथा सिविल सोसाइटी में रखा गया. बहुत सारे सुझाओ पर विचार विमर्श करने के पश्चात इस नई निति (NEP -2020 ) की घोसणा की गई. यहाँ पर देखने वाली बात है की विपक्ष के नेताओ ने भी इसकी सराहना की है. क्युकी यह निति किसी एक सरकार या पक्ष के लिए नहीं है बल्कि यह देश की जनता के लिए है. उदहारण के लिए कांग्रेस पार्टी के जाने माने और तेज तर्रार नेता श्री शशि थरूर इसके बारे में अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखते है कि यह अपने आप में बहुत ही क्रांतिकारी और महत्वाकांक्षी योजना है. हालाँकि इस निति को संसद में प्रस्तुत करनी चाहिए जिससे की इसको सांसदों के सुझाओ और सलाहों से और बेहतर बनाये जा सके. आगे उन्होंने सुझाया की इस निति के बेहतर कार्यान्वन पर जोर दिया जाना चाहिए।
आइये निचे के बिन्दुओ में इस निति के बारे में संक्षेप में जाना जाय –
⦁ इस निति का प्रयास है की प्राथमिक तथा मध्यम स्कूल में १००% enlrolment रहे। उच्चतर संस्थानों में इसका जोर है की एनरोलमेंट को बढ़ा कर ५०% किया जाय जो की आज के हिसाब से २६% के आसपास है.
⦁ बच्चो की शिखा ३ साल की उम्र से प्रारम्भ की जाए. और ३ से ६ साल तक की पढाई की जिम्मेदारी राज्य की रहेगी. जैसा की आप जानते है की शिक्षा के अधिकार क़ानून के तहत ६ से १४ वर्ष तक की शिक्षा की जिम्मेदारी राज्य की है. अब नई निति के अंतर्गत ३-१८ तक की जिम्मेद्दारी राज्य की रहेगी. ३-६ वाली शिक्षा को सामान्यतः हम kindergarden के नाम से जानते है जो की शहरों में चलते है.गाँव क्षेत्र में यह काम आंगनवाड़ी करता है।
⦁ अभी तक हमरी शिक्षा पद्धति उनलोगो को पुरष्कृत करती थी जो रटन्त विद्या में माहिर थे तथा रट्टू माध्यम से अधिक नंबर लाते थे परन्तु अब इस नयी निति में परीक्षाओ को आसान बनाया जायेगा जो आपकी याददास्त और रटंत विद्या नहीं बल्कि आपके core knowledge या कोर competency को टेस्ट करेगी. बोर्ड एग्जाम अब साल में एक बारे की बजाय दो बार कराये जायेंगे.
⦁ coding कोडिंग भाषा जो की एक कंप्यूटर भाषा है जिसका उपयोग सॉफ्टवेयर, प्रोग्राम, इंटेरेंट , और एप्प्स इत्यादि बनाने में उपयोग होती है , क्लास ६ से बच्चो को सिखाई जाएगी जिससे उनका ज्ञान और रूचि इस तरफ और आसानी से बढ़े। पश्चिमी देशो के उद्यमी जैसे की बिल गेट्स , मार्क जुकेरबर्ग तथा एलान मस्क इत्यादी ने कोडिंग की भाषा १ ३ -१४ उम्र से करना प्रारम्भ कर दिया।
⦁ अब शिक्षा व्यवस्था को चार भागो में बता जायेगा जैसे की 5 +3 +3 +4 यानि कि –
5 = प्राथमिक शिक्षा ( 5 Years)
3 =माध्यमिक शिक्षा (3 Years)
3 = हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट (3 Yars)
4 = स्नातक / graduation (4 Years)
⦁ 4 साल के स्नातक के दौरान विधार्थियो को हर साल क्रेडिट स्कोर मिलेग जिसको वो सेव करके रख सकते है तथा अगर किसी कारन वश वो अपना स्नातक पूरा नहीं कर पाते है तथा बीच में ही उन्हें कॉलेज छोड़ कर जाना पड़ता है तो भविष्य में कभी भी इस क्रेडिट स्कोर के दम पर वह से आगे की पढाई जारी कर सकते है. उदहारण के लिए अगर किसी स्नातक डिग्री के लिए अगर आपको १०० क्रेडिट्स की आवश्यकता है और आपके पास पहले से ही ३० क्रेडिट है तो आपको मात्रा ७० क्रेडिट स्कोर वाली पढाई करनी होगी। हर साल एग्जिट करने पर आपको कोई न कोई सर्टिफिकेट मिलेगा जैसे की अगर आप एक साल में स्नातक छोड़ के जा रहे है तो आपको एक सर्टिफिकेट , दो साल के लिए डिप्लोमा तथा तीन साल के लिए उससे ऊपर का सर्टिफिकेट मिल जायेगा.
⦁ इस निति में नया curriculum पाठ्यक्रम तैयार किया जायेगा जो की आज के समाज के हिसाब से बहुत व्यावहारिक तथा practical होगा. इससे जो बच्चो के भारी बैग के बोझ की समस्या है उसे कम किया जायेगा।
⦁ मातृया भाषा तथा क्षेत्रीय भाषाओ पर जोर दिया गया है , जैसा की ये सर्वविदित है की अगर बालक को उसको अपनी मातृ भाषा में पढ़ाया जाये तो उसके सिखने की क्षमता कई गुनी बढ़ जाती है।
⦁ हालांकि इसमें आगे भी यह स्पष्ट किया गया है की है कि जहा तक संभव हो सके वहा तक। इसमें कोई जोर जबरदस्ती नहीं है। उदहारण के लिए अगर आप केंद्रीय विद्यालओं की तरफ देखे तो उनमे देश विभिन्न हिस्सों से कर्मचारियों के बच्चे पड़ने आते है और उनकी मातृ भाषा अलग अलग हो सकती है। तो यहाँ समस्या आ जाएगी की उनको किश भाषा में सिक्षा दी जाये.
⦁ M. PHIL. को समाप्त कर दिया गया है. पहले जहा रिसर्च करने के लिए MA के बाद MPHIL करना पड़ता था. अब MA के बाद आप सीधे रीसर्च के क्षेत्र में जा सकते है.
⦁ आगे के १५ साल यानी की 2035 तक या प्रयाश किया जायेगा की जो भी अफलिएटेड कॉलेजेस है वो अपने आप में ऑटोनोमस बन जाये तथा वो खुद की डिग्री अपने स्टूडेंट्स को दे सके.
⦁ क्लास ६ से बच्चो को अलग अलग VOCATIONAL ट्रैनिग ( व्यवसायिक प्रशिक्षण ) मिलनी प्रारम्भ हो जाएगी जिससे की उनकी स्किल डेवेलोपमेंट हो सके तथा अलग अलग क्षेत्रो में वो अपना विकाश कर सके।
⦁ ये वोकेशनल ट्रेनिंग निम्न प्रकार की हो सकती है जैसे की कारपेंटर, फोटोग्राफी, ब्यूटिशियन,टेलरिंग , मैकेनिक, पेंटिंग, इलेक्ट्रीशियन इत्यादि. ये सब ऐसी स्किल है जो हमारे आम रोजमर्रा की जिंदगी में आती है तथा अगर बालक पढाई में कमल नहीं कर सकता है तो उसके पास ऐसी स्किल होंगी जिससे आगे चलकर वो अपना व्यवसाय या रोजगार प्राप्त कर सके.
⦁ आज की शिक्षा पद्धति के हिसाब से अलग शिक्षण संस्थानों के लिए लिए अलग अलग नियामक संसथान है. जो आपस में RED Tapism में उलझे हुए है जैसे कि AICTE , UGC इत्यादि। अब चिकित्सा तथा कानूनी शिक्षा को छोड़कर बाकि सब संस्थानों के लिए केवल एक ही नियामक होगा जिसका नाम होगा HIGHER EDUCATION COMMISSION OF INDIA भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग. शिक्षा क्षेत्र पर खर्च जीडीपी का 4. 5 % से बढाकर ६% कर दिया जायेगा.
⦁ HRD मिनिस्ट्री ( मानव संसाधन मंत्रालय ) का नाम बदलकर education ministry यानि की शिक्षा मंत्रालय कर दिया जायेगा.


क्या अंतर है १९८६ शिक्षा निति (Education Policy of 1986 ) और नई शिक्षा निति २०२० में.-(difference between new education policy 2020 and old education policy 1986)

अभी तक जो शिक्षा निति है वो १९८६ से चली आ रही है। इसको राजीव गाँधी जी के सरकार के समय लागू किया किया गया था जिसमे संसोधन १९९२ में किया गया था. आइये निचे के बिन्दुओ में जानते है की नई निति और पुरानी निति में क्या अंतर है-
⦁ जैसा की यह सर्वविदित है की भारत के उच्चतर शिक्षा संस्थानों से डिग्री प्राप्त करने के पश्चात भी हमारे अघिकतर युवा सीधे सीधे इंडस्ट्रीज में एम्प्लॉयड होने के योग्य नहीं है। ऐसा भारत में ही नहीं बल्कि बाहर के देशो के इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा है. इसका कारण यह है की हमारे अधितकर संस्थानो में जो पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है वो आजके समय के हिसाब से प्रैक्टिकल नहीं है. आज की इंडस्ट्रीज की डिमांड और हमारी शिक्षा में बहुत ही ज्यादा गैप है. यानि की हमारे पाठ्यक्रम डायनामिक नहीं है अर्थात समय समय पर डिमांड के हिसाब से बदलते नहीं है। नई निति का यही प्रयास है की हमारे संस्थानों में जो पढ़ाया जय वो इंडस्ट्रीज की स्किल डिमांड को पूरा कर सकने में सफल हो सके. बदलते पाठ्यक्रम, कोडिंग तथा व्यावसायिक शिक्षा इत्यादि इस दिशा में नई शिक्षा निति द्वारा उठाये गए सार्थक कदमो में से एक है. स्कूल पाठ्यक्रम में नई शिक्षा निति द्वारा बृहद बदलाव किया जायेगा.
⦁ नई निति में ५+३+३+४ पद्धति है जबकि पुरानी में ५+३+४+३ है. नई शिक्षा निति एक बालक के सर्वांगीड़ विकाश हेतु तैयार की गई है. जिसमे में न वो शिक्षा क्षेत्र बल्कि एक समाज क्षेत्र में कुशल नागरिक बनकर उभरे।
⦁ पुरानी निति में रिसर्च के लिए MPHIL आवश्यक था जबकी नई निति में आप MA के पश्चात सीधे सीधे रिसर्च यानि अनुशंधान के क्षेत्र में प्रवेश पा सकते है।
⦁ पुरानी निति में मातृ भाषा पर जोर नहीं था जबकि नई निति के हिसाब से जहा तक संभव हो सके विद्यार्थियों को शिक्षा मातृ भाषा में दी जाएगी।

क्यों जरुरी है नई शिक्षा निति २०२०


जैसा की हम ऊपर के बिन्दुओ में देख चुके है की हमारे युवा भारत के उच्चतर संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात भी इंडस्ट्रीज में एम्प्लॉयमेंट के काबिल नहीं पाए जाते है. यह पर नई निति बहुत ही जरुरी हो जाती है जो की पाठ्यक्रम में शिक्षा व्यवश्था में बदलाव करके हमारे युवाओ को इंडस्ट्रीज में डायरेक्ट रोजगार के लिए तैयार करेगी. इसमें पाठ्यक्रम को डायनामिक रखा जायेगा जो की समय के हिसाब से इंडस्ट्रीज के स्किल डिमांड तथा युवाओ के प्राप्त स्किल्स के बीच के गैप को कम करेगा.
अंग्रेजी में एक कहावत है jack of all trade master of none , अगर इसको हम थोड़ा सा बदले तो यह हो सकता है jack of all trade master of one यानि की जो जाने सबकुछ थोड़ा थोड़ा परन्तु पारंगत हासिल हो एक विषय में. New education policy 2020 का एक प्रयास ये भी है. जो की काफी सराहनीय है.
आज कि शिक्षा पद्धति सिखने और ज्ञान से ज्यादा विद्या पर ज्यादा फोकस करती है. नई निति इस कमी को दूर करने का प्रयास कर रही है. जिसमे बोर्ड परीक्षाओ को सरल बना दिया जायेगा. जिसमे आपके याददास्त की नहीं बल्कि आपके ज्ञान की परीक्षा होगी.
विद्यार्थीओ के सर्वांगीड़ विकाश हेतु यह निति बहुत ही आवश्यक है जैसे कि कौशल विकाश , वयवसायिक ज्ञान विकाश, इत्यादि। इसके माध्यम से बालक न केवल कुशल बल्कि एक सफल नागरिक के रूप में उभर कर समाज में सामने आएंगे.
नई शिक्षा निति में शामिल कोडन, वोकेशनल ट्रेनिंग, इत्यादि आत्मा निर्भर बनाने में बहुत काम आएंगे जिससे के व्यक्ति रोजगार ढूंढ़ने वाला नहीं बल्कि रोजगार उपलब्ध करने वाला बन सकता है.


क्या विवाद है नई शिक्षा निति को लेकर
(dispute regarding new education polic 2020)


नई शिक्षा निति से सम्बंधित विवादों को हम निचे के तीन बिन्दुओ में देखेंगे –
⦁ जब इस शिक्षा निति को २०१८ में ड्राफ्ट यानि कि मसौदे के रूप में प्रस्तुत किया गया तो उसमे Three Language Formula यानि की तीन भाषा फार्मूला दिया गया था. जिसमे यह कहा गया कि एक भाषा हिंदी, दूसरी, क्षेत्रीय तथा तीसरी विदेशी भाषा होगी. जिसका कुछ दक्षिण भारतीय राज्यों ने विरोध किया यह कहते हुए कि यह केंद्र सर्कार द्वारा उनपर हिंदी थोपने का प्रयाश है. हालाँकि अभी की घोषित निति में इस फॉर्मूले को हटा लिया गया है।
⦁ कुछ बुद्धिजीवी इसका यह कह कर विरोध कर रहे है की यह आरएसएस RSS द्वारा hindiesm यानि की हिंदी को बढ़ावा देने वाली पालिसी जिसे केंद्र सरकार द्वारा आरएसएस के दबाव में लाया गया है. यहाँ पर आरएसएस का मतलब है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। क्युकी भाषा का चुनाव राज्यों के ऊपर छोड़ा गया है और बहुत सरे राज्यों में बीजेपी की सरकार है जो हिंदी को माध्यम बांयेगी शिक्षा द्वारा।
⦁ आप गाँव गाँव चले जाइये वह पर हर कोई सक्षम परिवार अपने बच्चो को इंग्लिश मध्यम स्कूल में डालना चाहता है बजाय हिंदी मध्यम के। क्युकी उनको अपने बच्चो का भविष्य इंग्लिश मध्यम में ज्यादा उज्जवल लगता है. जो की काफी हद तक सही भी है.

आगे क्या कदम उठाये जा सकते है.


यह तो सर्वविदित है की भारत में नीतिया कागज पर बहुत ही अच्छी अच्छी बनती परन्तु सही ढंग से कार्यान्वन न होने की वजह से कुछ अधिक प्रभाव वो जमीनी स्तर पर ना दिखा सकी. इस निति का इम्प्लीमेंटेशन, एक्सेक्यूशन और मॉनिटरिंग बहुत ही अच्छे से होनीं चाहिए भविष्य की सरकारों द्वारा।
हर साल शिक्षा क्षेत्र का बजट बढ़ाया जाय जैसा की रक्षा बजट बढ़ाया जाता है.
इस निति का भविष्य में समय समय पर मूल्याङ्कन किया जाय तथा जो भी कमिया हो उनको दूर करने कर प्रयाश किया जाये.
टीचर भर्ती पर जोर दिया जाय, उनको समय समय पर सही प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाय जिससे वो बदलते समय के हिसाब से अपने आप बदल सके तथा सार्थक तथा संगत गायन बालको को दे सके.
उच्चतर शिक्षण संस्थानों में सीटों की सांख्य बढ़ाया जाए। क्युकी इस निति का लक्ष्य है ५०% एनरोलमेंट उच्चतर संस्थानों में। अभी लगभग २६% एनरोलमेंट Ratio है. अगर इसको बढाकर ५० करना है तो सीटों की संख्या बढ़नी चाहिए।

मुझे आशा है कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा. अगर पसंद आया हो तो इसे बाकि लोगो के साथ भी साझा करें. धन्यवाद्।

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